आज के इस खूबसूरत सा मुकद्दस लेख में आप कुरान-ए-करीम की एक बहुत ही अजीमुश्शान सूरह यानी कि Surah Al Asr in Hindi में जानेंगे, साथ ही रोमन इंग्लिश में भी लिखा है।
जिसे आप अपने मुताबिक सही और आसान लफ्जों का चयन करके सूरह अल अस्र को पढ़ कर समझ सकें ताकी दोबारा से कहीं और आपको फिर से इसे तलाशना ना पड़े।
मेरा यकीन मानिए अगर आप इसे ध्यान से दिलो जेहन लगा कर पढ़ेंगे तो यह आपको आसानी से याद भी हो जाएगी क्योंकि यह छोटी सूरह है इसमें कुछ ही आयतें हैं।
Surah Al Asr in Hindi

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहिम
वल असर
इन्नल इनसा न लफी खुस्र
इल्लल लजि न आमनू व अमिलुस सालिहाति वत वासौ बिल हक्कि वत वासौ बिस सब्र
Surah Al Asr Tarjuma in Hindi
अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहमत वाला, इस जमाना ए महबुब कि कसम बेशक आदमी जरूर नुकसान में है मगर जो इमान लाए और अच्छे काम किये और एक दुसरे को हक की ताकिद की और एक दुसरे को सब्र की वसीयत दी।
Surah Asr in Roman English
Bismillah Hirrahmaan Nirraheem.
Wal Asr
Innal Insaa-na Lafee Khusr
Illal Lazee-na Aamnoo Wa Amilus Saalihaatee Wat Waasau Beel Haqqi Wat Waasau Bees Sabr.
सूरह अल अस्र की तफसीर
सूरह अल अस्र जम्हूर के नजदीक मक्की है इसमें 1 रूकु, 3 आयत, 14 कलिमें और 68 अक्षर है।
अस्र यानी जमाने को कहते हैं और ज़माना चूंकि अजाइबात पर आधारित है इसमें हालत का बदलाव उतार चढ़ाव देखने वाले के लिए सबक पकड़ने का कारण होता है।
यह चीजें हिकमत वाले खालिक की कुदरत और उसकी वहदानियत को परमानित करती है इसीलिए हो सकता है कि जमाने की कसम मुराद हो।
अस्र उस वक्त को भी कहते हैं जो सूर्यास्त से पहले होता है हो सकता है कि खसारे वाले के हक में उस वक्त की कसम याद फरमाई जाए।
जैसा कि राबेअ के हक में दुहा यानी चास्त की वक्त की कसम याद फरमाई थी और एक कौल यह भी है कि अस्र से अस्र की नमाज़ मुराद हो सकती है।
जो दिन की इबादतों में सबसे पिछली इबादत है और सबसे लज़ीज़ और बेहतर तफसीर वही है जो इमाम अहमद रज़ा रहमतुल्लाह अलैह ने इख्तियार फरमाई।
कि जमाने में मखसूस जमाना सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम का मुराद है जो बड़ी खैरो बरकत का ज़माना और तमाम जमानों में सबसे बुजुर्गी वाला है।
अल्लाह तआला ने हुजूर की मुबारक जमाने कि कसम याद फरमाई जैसा की लाउक्सिमों बिहाजल वलद में हुजूर के मरकन और मकान की कसम याद फरमाई है।
और जैसा कि लउमरका में आपकी उम्र शरीफ की कसम याद फरमाई और इसमें शाने महबूबियत का इज़हार है। उसकी उम्र जो उसका रासुल माल है और असल पूंजी है वह हर दम घट रही है।
यानी ईमान और नेक कर्मों की उन तकलीफों और मशकतों पर जो दीन की राह में पेश आई ये लोग अल्लाह के फ़ज़ल से टोटे में नहीं है क्यूंकि उनकी जितनी उम्र गुजरी नेकी और ताअत में गुजरी तो वो नफा पाने वाले हैं।
आख़िरी लफ्ज़
अब तक तो आप भी सूरह अल अस्र हिंदी और रोमन इंग्लिश में पढ़ कर सही से और आसानी से समझ गए होंगे साथ ही हमने यहां पर इसकी तफसीर भी बयां की थी जिसे आप इसका मैसेज भी जान सकें।
हमने यहां पर तमाम बातों को अपने जानिब से साफ और आसान लफ्जों में बताया था जिसे आप आसानी से समझ जाएं और कुछ डिफिकल्ट लगा हो तो आप हमसे पूछ सकते हैं।
ऐ अल्लाह तबारक व तआला हमसे किसी से भी यहां पर सूरह अल अस्र को पढ़ने या लिखने में एक आयत या एक हर्फ या फिर एक नुक्ते का भी ग़लती हुई हो तो अपने फ़ज़्लो करम से माफ अता फरमा।
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